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स्व. सेठ राधाकिशन जी अग्रवाल की पुण्य स्मृति में गोयल परिवार का अनुकरणीय आयोजन; व्यासपीठ से गूंजे पंडित श्याम मनावत के अनमोल वचन—’श्रुति की कोख से ही जन्म लेती है श्रद्धा’ !

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जो बिना कहे पिता के मन की बात जान ले वही राम, जो किसी की न सुने वह रावण ,आठ दिवसीय विराट शिवपुराण ज्ञानयज्ञ के प्रथम सोपान पर उमड़ा आस्था का अगाध जनसैलाब ।

घनश्याम शर्मा माचलपुर

माचलपुर (ब्यूरो) नगर के बजरंग रोड पर स्थित अग्रवाल धर्मशाला में धर्म, आस्था और अध्यात्म की दिव्य त्रिवेणी प्रवाहित हो रही है । यहाँ स्व. सेठ राधाकिशन जी अग्रवाल की पावन स्मृति में उनके सुपुत्र अरुण कुमार गोयल द्वारा भव्य आठ दिवसीय शिव महापुराण कथा का शुभारंभ अत्यंत गरिमामयी और अलौकिक वातावरण में हुआ । कथा के प्रथम दिवस महाकाल की नगरी उज्जैन से पधारे अंतर्राष्ट्रीय कथा प्रवक्ता व प्रख्यात मानस मर्मज्ञ पूज्य गुरुदेव पंडित श्याम जी मनावत के मुखारविंद से अमृतवाणी श्रवण करने के लिए श्रद्धालुओं का बड़ी संख्या में शिव भक्तों से पंडाल भरा था ।

“बैंड-बाजों की मधुर धुनों पर झूमे श्रद्धालु, पुष्प वर्षा से महका नगर”

शिव महापुराण कथा के गरिमामयी शुभारंभ के पूर्व नगर के ऐतिहासिक भोलाराम मंदिर से एक विशाल एवं भव्य कलश व शोभायात्रा प्रारंभ हुई ।बैंड-बाजों की मधुर धार्मिक धुनों और ढोल-धमाकों के साथ निकली इस यात्रा में भगवान का विमान व गोयल परिवार के वरिष्ठ सदस्य अरुण कुमार गोयल अपने सिर पर पवित्र शिव महापुराण ग्रंथ (पोथी जी) को धारण कर पूरे आदर भाव और असीम श्रद्धा के साथ चल रहे थे । यह मंगल यात्रा नगर के विभिन्न प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी,जहाँ जगह-जगह धर्मप्रेमी जनता और श्रद्धालुओं द्वारा पुष्वर्षा कर स्वागत किया गया यात्रा में साथ चल रहे लोगों को जलपान करवाया ।

“कथा स्थल पहुँची शोभायात्रा,अरुण कुमार गोयल परिवार ने किया मुख्य पूजन”

नगर भ्रमण करते हुए जब यह भव्य शोभायात्रा मुख्य कथा स्थल अग्रवाल धर्मशाला पहुँची,तो वहाँ उपस्थित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने गगन भेदी जयकारों के साथ यात्रा का आत्मीय स्वागत किया । इसके बाद मुख्य मनोरथी के रूप में अरुण कुमार गोयल एवं उनके पूरे परिवार जनों द्वारा पवित्र शिव महापुराण ग्रंथ एवं व्यासपीठ की पूरे विधि विधान,असीम श्रद्धा भाव और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मुख्य पूजा अर्चन व आरती की गई । तत्पश्चात पूज्य गुरुदेव पंडित श्याम जी मनावत ने संगीतमयी दिव्य मंगलाचरण और शिव स्तुति के साथ कथा का दिव्य शंखनाद किया । यह भव्य कथा आगामी 21 अगस्त तक प्रतिदिन दोपहर 2:00 बजे से सायंकाल 5:00 बजे तक अनवरत जारी रहेगी ।

“श्रुति की कोख से जन्म लेती है श्रद्धा,जीवन में सत्य सुनना अनिवार्य” — पंडित श्याम मनावत”

व्यासपीठ से पहले दिन की कथा का दिव्य रसपान कराते हुए पंडित श्याम जी मनावत ने जीवन में ‘सुनने’ (श्रवण) के महत्व को बेहद गहराई से समझाया । उन्होंने कहा कि श्रद्धा से ही ज्ञान की प्राप्ति होती है,परंतु यह श्रद्धा हमेशा श्रुति की कोख से जन्म लेती है जब हम इन कानों से किसी का महत्व या महिमा सुनते हैं, तभी उसके प्रति हमारे भीतर सच्ची श्रद्धा जाग्रत होती है । पंडित जी ने कड़ा संदेश देते हुए कहा कि मनुष्य जैसा सुनता है,उसकी वाणी और विचार भी वैसे ही हो जाते हैं यदि हम रामायण, श्रीमद्भागवत और गीता सुनेंगे,तो हमारी वाणी में भी वही दिव्यता झलकेगी । इसके विपरीत,यदि हम निरर्थक और फालतू लोगों को सुनेंगे,तो हमारा आचरण भी व्यर्थ हो जाएगा । इसलिए जीवन में सदैव सत्य,शुभ और कल्याणकारी ही सुनना चाहिए ।

“जो किसी की नहीं सुनता वह रावण,जो बिना कहे सुन ले वह राम”

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम और लंकापति रावण का सटीक उदाहरण देते हुए पंडित जी ने समाज को व्यावहारिक जीवन का सबसे बड़ा पाठ पढ़ाया । उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति अहंकारी होता है और जीवन में कभी किसी की नहीं सुनता,वह रावण की प्रवृत्ति का होता है इसके विपरीत,जो बिना कहे ही अपने माता-पिता के मन की बात और इच्छा को जान लेता है,वही राम है। महाराज दशरथ ने अपने श्रीमुख से एक बार भी राम जी से वन जाने को नहीं कहा था,परंतु पिता के वचनों की लाज और उनकी आंतरिक इच्छा को जानकर श्री राम सहर्ष वन गमन को चल दिए यही आदर्श आज के युवाओं को अपने जीवन में उतारना चाहिए ।

“देवराज के प्रसंग ने भक्तों को किया भाव विभोर”

पंडित जी ने कलयुग में शिवकथा की महिमा बताते हुए दुराचारी देवराज ब्राह्मण का अत्यंत मार्मिक प्रसंग सुनाया । उन्होंने बताया कि किस प्रकार जीवनभर अधर्म और दुराचार के मार्ग पर चलने वाले देवराज को अंत समय में अनजाने ही सही, शिव मंदिर में बैठकर शिव महापुराण की कथा सुनने का परम सौभाग्य प्राप्त हुआ । इस कथा के दिव्य श्रवण प्रभाव से उसके समस्त पाप भस्म हो गए और मृत्यु के पश्चात यमदूतों के स्थान पर भगवान शिव के दिव्य गण उसे ससम्मान कैलाश धाम ले गए । शिव जी की इस असीम दयालुता का प्रसंग और पंडित जी द्वारा गाए गए मर्मस्पर्शी भजनों को सुनकर पंडाल में उपस्थित श्रद्धालुओं को थिरकने पर मजबूर कर दिया । अग्रवाल धर्मशाला में निर्मित यह आध्यात्मिक वातावरण नगर के युवाओं और बच्चों में सनातन धर्म के उच्च संस्कार सिंचित करने का महान कार्य कर रहा है ।

आयोजक परिवार ने जानकारी देते हुए बताया कि कथा की भव्य पूर्णाहूति के अवसर पर आगामी 21 अगस्त को विशाल महाप्रसाद का आयोजन किया गया है । महाप्रसाद का वितरण दोपहर 12:00 बजे से अपराह्न 3:00 बजे तक प्रभु इच्छा तक किया जाएगा । गोयल परिवार ने सभी धर्मप्रेमी जनता से समय का विशेष ध्यान रखते हुए 14 से 21 अगस्त तक प्रतिदिन दोपहर 2 से 5 बजे कथा श्रवण करने तथा 21 अगस्त को दोपहर 12 से 3 बजे तक महाप्रसाद ग्रहण करने की अपील की है ।

Khushi Samvad
Author: Khushi Samvad

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