भव्य पंडालों में उमड़ेगी बेटियों की भीड़, पर सुरक्षा राम भरोसे,दशहरा मैदान और ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर अब तक कोई मुकम्मल चर्चा नहीं ।
घनश्याम शर्मा माचलपुर
माचलपुर / राजगढ़:- आगामी 11 अक्टूबर से आस्था और शक्ति की आराधना का महापर्व शारदीय नवरात्रि प्रारंभ होने जा रहा है। नगर में दर्जनों भव्य पंडालों में मां दुर्गा की प्रतिमाएं विराजित होंगी, मंदिरों में आस्था का सैलाब उमड़ेगा और देर रात तक गरबा रास में बड़ी संख्या में नगर की बेटियां और महिलाएं शामिल होंगी । इसके ठीक बाद विजयादशमी का बड़ा पर्व भी आयोजित होना है, जिसके लिए दशहरा मैदान की सुरक्षा व व्यवस्था बेहद संवेदनशील मानी जाती है इन तमाम गंभीर व्यवस्थाओं को लेकर जो खाका बहुत पहले खिंच जाना चाहिए था, उसे लेकर स्थानीय पुलिस और प्रशासन आज भी गहरी नींद में सोया हुआ है ।
“त्योहार सिर पर, पर तैयारी ‘शून्य'”
11 अक्टूबर को होने वाली घट स्थापना और नौ दिनों तक चलने वाले इस महापर्व को देखते हुए कानून-व्यवस्था, सुरक्षा और यातायात प्रबंधन के लिए पुलिस-प्रशासन को हफ़्तों पहले से मुस्तैद हो जाना चाहिए था । नगर की दुर्गा उत्सव समितियों और प्रबुद्ध नागरिकों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि त्योहार सिर पर आ चुके हैं, लेकिन प्रशासन की तरफ से अब तक कोई सुगबुगाहट नजर नहीं आ रही है । जनता का सवाल है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी अप्रिय घटना के इंतजार में हाथ पर हाथ धरे बैठा है ? आजकल त्यौहार के एक दिन पूर्व या उसी दिन बैठक आयोजित कर रस्म अदायगी निभाई जा रही है जो पूर्ण रूप से गलत है ।
“इन प्रमुख व्यवस्थाओं पर कब होगा विचार” :
• गरबा पंडालों में बेटियों की सुरक्षा: गरबा महोत्सव में बड़ी संख्या में माताएं-बहनें और बालिकाएं शामिल होंगी । असामाजिक तत्वों और मनचलों पर नजर रखने के लिए महिला पुलिस बल की तैनाती की मांग अब तक कागजों में भी दर्ज नहीं हो सकी है ।
• दशहरा मैदान की सुरक्षा अधर में: विजयादशमी पर रावण दहन के दौरान हजारों की संख्या में जनता जुटती है। मैदान की बैरिकेडिंग, आपातकालीन निकास और सुरक्षा को लेकर अब तक कोई योजना नहीं बनाई गई ।
• सड़कों पर जाम का खतरा: विजय दशमी पर दशहरा मैदान पर भारी भीड़ रहेगी। यदि समय रहते रूट डायवर्जन और नो-एंट्री प्लान लागू नहीं किया गया, तो नगर जाम व दुर्घटना का डर रहेगा ।
“ऐन वक्त की बैठक सिर्फ ‘कागजी खानापूर्ति”
नगरवासियों का कहना है कि प्रशासन की यह पुरानी आदत बन चुकी है कि जब त्योहार शुरू हो जाते हैं,तब शांति समिति की बैठक बुलाकर फोटो खिंचवाई जाती है । ऐसी बैठकों की रस्म अदायगी का धरातल पर कोई व्यावहारिक लाभ नहीं दिखता। जागरूक नागरिकों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यदि 11 अक्टूबर से पहले सुरक्षा और ट्रैफिक का ठोस प्लान धरातल पर नहीं उतरा, तो किसी भी अव्यवस्था या हादसे की शत-प्रतिशत जिम्मेदारी माचलपुर पुलिस और स्थानीय प्रशासन की होगी ।










