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राजगढ़ में मिठाइयों के सैंपल तो लिए,पर कार्रवाई कब ? खानापूर्ति बन रहा खाद्य विभाग का निरीक्षण अभियान !

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कलेक्टर के नाम पर जनसंपर्क से सुर्खियां बटोर रहा विभाग,बोड़ा में मावा लड्डू और बर्फी के नमूने तो लिए,पर पहले लिए उन नमूना का क्या ?

घनश्याम शर्मा माचलपुर

माचलपुर/ राजगढ़ :- त्योहारी सीजन शुरू होते ही मिलावट खोरों पर नकेल कसने के नाम पर खाद्य सुरक्षा विभाग सिर्फ सैंपल लेने और सरकारी प्रेस नोट जारी कर वाह वाही लूटने तक सीमित रह गया है । जिला जनसंपर्क कार्यालय द्वारा जारी खबरों के माध्यम से विभाग अपनी पीठ तो थपथपा रहा है, लेकिन धरातल पर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई न होने से यह पूराअभियान महज एक प्रशासनिकऔपचारिकता नजर आ रहा है ।

हालिया मामले में, कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा के निर्देशन का हवाला देते हुए खाद्य सुरक्षा अधिकारी एस.एस. खत्री ने न्यू बस स्टैंड, बोड़ा (तहसील नरसिंहगढ़) स्थित ‘विनायक स्वीट्स’ से मावा लड्डू और ‘फलोदी रेस्टोरेंट’ से मावा बर्फी के नमूने लिए हैं । विभाग का पारंपरिक दावा है कि इन नमूनों को राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोग शाला भेजा जा रहा है और रिपोर्ट आने पर आगामी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। प्रेस नोट में हमेशा की तरह स्वच्छता,उचित भंडारण, लाइसेंस की जांच करने और संचालकों को सख्त निर्देश देने की बातें भी बढ़-चढ़कर कही गई है ।

“बड़ा सवाल: सिर्फ छापों की नुमाइश, नतीजों पर चुप्पी क्यों” ?

इस पूरी सरकारी कवायद के बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर यह सिर्फ ‘सैंपल लेने’ की शुरुआती खानापूर्ति कब खत्म होगी और दोषियों पर वास्तविक एक्शन का दौर कब शुरू होगा ? हर बार कलेक्टर के निर्देश का सहारा लेकर निरीक्षण की खबरें तो अखबारों की सुर्खियां बन जाती हैं, लेकिन विभाग आज तक यह सार्वजनिक नहीं कर पाया है कि महीनों से चल रहे इस अभियान का अंतिम नतीजा क्या निकला ।

❓ “प्रेस नोट के जरिए ही जनता को ये 3 जवाब भी दे विभाग”

1. सैंपलों का हिसाब कहां है ?: विगत माह में व इस चालू माह में जिले भर से कुल कितने सैंपल लिए गए हैं और उनकी मौजूदा स्थिति (स्टेटस) क्या है, इसे भी प्रेस नोट में शामिल क्यों नहीं किया जाता ?
2. फेल सैंपलों की सूची कहां है?: पिछले महीनों में जो सैंपल प्रयोगशाला भेजे गए थे, उनमें से कितने अमानक या सेहत के लिए असुरक्षित पाए गए, उनके नाम सार्वजनिक क्यों नहीं किए जाते ?
3. कितनों पर चला प्रशासन का डंडा?: सैंपल फेल होने के बाद अब तक कितनी दुकानें सील की गईं, कितनों के लाइसेंस निरस्त या निलंबित हुए और कुल कितना जुर्माना वसूला गया ?

“कार्रवाई की प्रामाणिकता के लिए आंकड़े सार्वजनिक करना जरूरी”

दीपावली और अन्य त्योहार मुहाने पर हैं और बाजार मावे व मिठाइयों से पटने लगे हैं । ऐसे में बिना फेल सैंपल और वास्तविक सजा के आंकड़े सार्वजनिक किए,सिर्फ ‘सैंपल लेकर जांच को भेज दिए हैं’ का राग अलापना मिलावट खोरों को अभयदान देने जैसा है । आम जनता अब यह जानना चाहती है कि मिलावट के खिलाफ यह जंग सिर्फ सरकारी कागजों और जनसंपर्क के वाट्सएप ग्रुप्स तक सीमित है या जमीन पर भी कोई असर है । अगर विभाग की कार्रवाई में वाकई ईमानदारी है, तो वह छापों की खबर के साथ-साथ अब तक हुई ठोस कार्रवाई के आंकड़े भी प्रेस नोट के जरिए जनता के सामने रखे, ताकि उसकी प्रामाणिकता साबित हो सके।

Khushi Samvad
Author: Khushi Samvad

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