
मुख्यमंत्री के ‘जन विश्वास’ के बीच आखिरी सफर में भी संकट मंत्री के इलाके में श्मशान घाट बदहाल,लोगों को नसीब नहीं अंतिम विदाई का सम्मान ।
घनश्याम शर्मा माचलपुर
माचलपुर / राजगढ़:- सरकार भले ही विकास के बड़े-बड़े दावे करे, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की हवा निकाल रही है । एक तरफ मुख्यमंत्री जनता का भरोसा जीतने की बात करते हैं, तो दूसरी तरफ हालात इतने खराब हैं कि इंसान को मरने के बाद भी दो गज जमीन और सम्मान नसीब नहीं हो पा रहा है । ताजा मामला सारंगपुर तहसील की ग्राम पंचायत सेमली लोढ़ा का है, जहाँ श्मशान घाट की दुर्दशा देखकर लोग प्रशासन को कोसने पर मजबूर है ।
“न रास्ता,न बैठने का ठिकाना शव ले जाना भी हुआ दूभर”
गांव के लोगों का कहना है कि आज के समय में श्मशान घाट तक जाने के लिए न तो ठीक से रास्ता है और न ही धूप बारिश से बचने के लिए बैठने उठने का कोई ठिकाना । जब गांव में किसी की मौत होती है, तो कंधे पर अर्थी उठाकर ले जाने वालों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है । श्मशान की यह हालत चीख-चीख कर कह रही है कि पंचायत में विकास सिर्फ कागजों पर हुआ है, जमीन पर कुछ नहीं बदला ।
“मंत्री के क्षेत्र में ऐसा हाल है , तो आप क्या उम्मीद” ?
यह मामला इसलिए और बड़ा हो जाता है क्योंकि यह मध्यप्रदेश शासन के मंत्री टेटवाल का गृह क्षेत्र है । इतने बड़े नेता के क्षेत्र में भी अगर श्मशान घाट जैसा जरूरी मूलभूत सुविधा का टोटा है और स्थान लावारिस पड़ा है, तो आम जनता कहाँ जाए ? ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि कही विकास के पैसों में भारी हेरफेर और भ्रष्टाचार तो नहीं हुई है ? जनता जीते जी तो बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस ही रही थी, अब मरने के बाद भी उसकी देह संकट में है ।
“साहब कब जागेंगे? जनपद CEO और तहसीलदार की जांच का इंतजार”
इस बदहाली और भ्रष्टाचार की गूंज अब अफसरों तक पहुँच चुकी है। अब देखना यह है कि जनपद सीईओ (CEO) और तहसीलदार इस मामले पर कब जागते हैं और कब इसकी जांच शुरू करवाते हैं । क्या इस श्मशान घाट का सुधार होगा या फिर मुख्यमंत्री का ‘जन विश्वास’ सिर्फ एक चुनावी नारा बनकर रह जाएगा? ग्रामीण अब कार्रवाई का रास्ता देख रहे हैं ।










