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सुठालिया परियोजना,भूख हड़ताल के दूसरे दिन समाजसेवी जयपाल खींची का घटा वजन, पिता से लिपटकर रोई मासूम देविका !

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सुठालिया परियोजना के प्रभावित किसानों के लिए संघर्ष जारी; दूसरे दिन ही चेहरे पर दिखने लगा हड़ताल का असर, प्रशासन की लापरवाही पर उठे सवाल ।

घनश्याम शर्मा माचलपुर

राजगढ़ / माचलपुर :- जिले की सुठालिया परियोजना से प्रभावित किसानों की जायज मांगों को लेकर जारी आंदोलन अब और तेज हो गया है । परियोजना प्रभावितों के हक की लड़ाई लड़ रहे प्रखर समाजसेवी जयपाल सिंह खींची की भूख हड़ताल आज दूसरे दिन भी जारी रही अनशन के कारण उनके स्वास्थ्य में लगातार गिरावट आ रही है, जिसकी पुष्टि आज स्वास्थ्य विभाग की मेडिकल टीम द्वारा किए गए चेकअप में हुई है ।

भूख हड़ताल स्थल पर पहुँची स्वास्थ्य विभाग की मेडिकल टीम ने समाज सेवी जयपाल सिंह खींची का विस्तृत स्वास्थ्य परीक्षण किया । इस दौरान डॉक्टरों ने उनके ब्लड प्रेशर (बीपी) और शुगर के स्तर की जांच की मेडिकल चेकअप के बाद स्वयं जयपाल सिंह खींची और आंदोलन स्थल पर मौजूद उनके साथी आंदोलनकारियों ने बताया कि अनशन के दूसरे दिन ही उनका वजन करीब 500 ग्राम से अधिक कम हो गया है । लगातार भूखे रहने के कारण उनके चेहरे पर कमजोरी और हड़ताल का साफ असर देखा जा सकता है ।

“पापा घर जल्दी आना…” रोते हुए स्कूल गई नन्ही देविका”

आंदोलन के बीच आज उस समय एक बेहद भावुक कर देने वाला नजारा देखने को मिला, जब जयपाल सिंह खींची की नन्ही बेटी देविका खींची अपने पापा से मिलने भूख हड़ताल स्थल पर पहुँची। अपने पिता को इस हालत में देखकर मासूम देविका भावुक हो गई और उनसे लिपट गई उसने रोते हुए अपने पिता का हाल-चाल जाना । जब वह स्कूल जाने के लिए निकलने लगी, तो उसकी आँखों में आँसू थे और उसने सिसकते हुए कहा, “पापा, घर जल्दी आना” । इस मर्मस्पर्शी दृश्य को देखकर वहाँ मौजूद सभी किसानों और समर्थकों की आँखें नम हो गईं ।

“प्रशासन की लापरवाही पर उठे सवाल”

समाज सेवी जयपाल सिंह खींची का वजन लगातार गिरने और स्वास्थ्य बिगड़ने को लेकर आंदोलनकारियों में प्रशासन के प्रति भारी रोष है। समर्थकों का कहना है कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की एक परमानेंट टीम को भूख हड़ताल स्थल पर तैनात किया जाना चाहिए । इसके विपरीत, मेडिकल टीम केवल औपचारिकता निभाकर और चेकअप करके वहाँ से वापस लौट गई आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जयपाल सिंह खींची के स्वास्थ्य को कुछ भी नुकसान होता है,तो इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी । किसानों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होती, यह अनशन वापस नहीं लिया जाएगा ।

Khushi Samvad
Author: Khushi Samvad

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