Edition

दोहरे उत्सव से महका माचलपुर, एक ओर सुहागिनों का रात दिन का कठिन तप, दूसरी ओर गाजे-बाजे के साथ ‘प्रथम पूज्य’ की अगवानी !

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

सिद्ध मंदिरों में देर रात तक चले धार्मिक अनुष्ठान, शिव पार्वती संग बाल गणेश की आराधना में डूबा रहा पूरा नगर ।

 घनश्याम शर्मा माचलपुर 

 राजगढ़ / माचलपुर :- बीता सोमवार माचलपुर नगर के इतिहास में आस्था, उमंग और दोहरी खुशियों के एक ऐसे दुर्लभ महासंयोग के रूप में दर्ज हो गया, जो दशकों में एकाध बार ही देखने को मिलता है । सोमवार को पंचांग के विशेष फेर से ‘हरतालिका तीज’ का अखंड व्रत और ‘गणेश जन्मोत्सव’ दोनों त्योहार एक ही दिन एक साथ पूरे उत्साह से मनाए गए साक्षात विघ्नहर्ता श्री गणेश अपनी माता पार्वती और पिता भगवान शिव के साथ नगर के भक्तों के घरों और पंडालों में पधार चुके हैं ।
इस महासंयोग का सबसे खूबसूरत रूप सोमवार की रात को देखने को मिला,जब पूरा माचलपुर दो अलग-अलग भक्ति रंगों में सराबोर नजर आया । एक तरफ जहाँ महिलाएं रात भर जाग कर तीज की आराधना में जुटी रहीं, वहीं दूसरी तरफ पुरुष गणेश उत्सव समितियों के पंडालों में बप्पा की भक्ति और व्यवस्थाओं में लीन रहे ।

“प्रमुख मंदिरों में हुए भव्य धार्मिक अनुष्ठान,अभिषेक हुआ दर्शनार्थ उमड़ी भीड़”

गणेश चतुर्थी और तीज के इस विशेष अवसर पर माचलपुर नगर के सिद्ध गणेश मंदिरों में सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा ।
बाजार चौक व बुरंज में स्थित गणेश मंदिर,नाना बाजार में स्थित गणेश मंदिर तथा भोलाराम मंदिर के पास स्थित मंदिरों पर सुबह भगवान गणेश का विशेष अभिषेक कर आकर्षक श्रृंगार किया गया, जिसके दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे । महाआरती का आयोजन किया गया,जहाँ देर रात तक भजन-कीर्तन का दौर चलता रहा और पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया । मंदिर समिति द्वारा विशेष धार्मिक अनुष्ठान किये जा रहे हैं ।

“दर्जन भर स्थानों पर विराजे “विघ्नहर्ता”, देर रात तक गूंजी महाआरती”

माचलपुर में गणेशोत्सव की धूम इस बार सातवें आसमान पर है । सोमवार को दोपहर के शुभ मुहूर्त में नगर के करीब दर्जन भर प्रमुख स्थानों पर सार्वजनिक गणेश उत्सव समितियों द्वारा गाजे-बाजे और ढोल-धमाकों के साथ गणपति बप्पा की प्रतिमाएं स्थापित की गईं । आकर्षक विद्युत सज्जा और पंडालों की भव्य थीम हर किसी को आकर्षित कर रही है सोमवार रात को पंडालों में हुई प्रथम महाआरती में पुरुषों और युवाओं की भारी भीड़ रही, जो देर रात तक बप्पा के जयकारे लगाते और प्रबंधन संभालते नजर आए ।

“सुहागिनों की कठिन साधना,रात भर गूंजे पारंपरिक तीज गीत”

उत्सव के इस दूसरे छोर पर, नगर की सुहागिन महिलाओं ने अपने सुहाग की लंबी उम्र और सुखी दांपत्य के लिए हरतालिका तीज का 24 घंटे का कठिन निर्जला व्रत रखा । सोमवार शाम को सूर्यास्त के बाद महिलाओं ने सोलह श्रृंगार कर घरों और सामूहिक स्थलों पर बालू (रेत) से भगवान शिव,माता पार्वती और गणेश जी की सुंदर मूर्तियां बनाकर प्रदोष काल की मुख्य पूजा संपन्न की ।

इसके बाद शुरू हुआ रात्रि जागरण का अटूट सिलसिला महिलाएं पूरी रात सोए बिना भजन-कीर्तन, हरतालिका व्रत कथा श्रवण और पारंपरिक तीज गीतों के गायन के साथ भगवान शिव-शक्ति की आराधना में लीन रहीं । महिलाओं का कहना था कि इस बार साक्षात गणेश जी भी अपनी माता पार्वती के साथ आए हैं, जिससे रात भर जागकर पूजा करने का आनंद और उत्साह दोगुना हो गया ।

आज मंगलवार सुबह करीब पांच बजे व्रतधारी महिलाओं द्वारा पारंपरिक रूप से जलाशयों में विसर्जन और पारण के साथ इस कठिन व्रत का समापन किया जा रहा है, वहीं माचलपुर नगर में अगले 10 दिनों के लिए गणेशोत्सव की भक्तिमय बहार शुरू हो चुकी है।

Khushi Samvad
Author: Khushi Samvad

Leave a Comment

और पढ़ें

traffic tail